इनक्लूसिव टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर के लिए जे.सी. बोस विश्वविद्यालय का चयन

इनक्लूसिव टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर के लिए जे.सी. बोस विश्वविद्यालय का चयन

Inclusive Technology Business Incubator

Inclusive Technology Business Incubator

- डीएसटी-निधि कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय को ₹5 करोड़ की सहायता की अनुशंसा
- हरियाणा में अपनी तरह का पहला बिजनेस इनक्यूबेटर (आई-टीबीआई), नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम को देगा नई गति

फरीदाबाद। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने नवाचार, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशंस (निधि) – इनक्लूसिव टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर्स (आई-टीबीआई) कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय द्वारा इनक्लूसिव टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (आई-टीबीआई) की स्थापना के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव को राष्ट्रीय विशेषज्ञ सलाहकार समिति (एनईएसी) द्वारा ₹5 करोड़ की सहायता के लिए अनुशंसित किया गया है।

कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय के आईपीआर, इनोवेशन एवं इनक्यूबेशन/स्टार्टअप डिवीजन के प्रभारी प्रो. संजीव गोयल तथा इनक्यूबेशन सेंटर की समन्वयक डॉ. सपना तनेजा को बधाई दी, जिनके निरंतर प्रयासों से यह प्रस्ताव अवधारणा के स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय विशेषज्ञ सलाहकार समिति द्वारा अनुशंसित किया गया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि एक सामूहिक प्रयास तथा इस पहल के विभिन्न चरणों में योगदान देने वाले सभी हितधारकों की प्रतिबद्धता का परिणाम है।

कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि ₹5 करोड़ की सहायता के लिए प्रस्ताव की अनुशंसा विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह एक समावेशी एवं प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार इकोसिस्टम विकसित करने के प्रति विश्वविद्यालय की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रस्तावित इनक्यूबेटर विश्वविद्यालय द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकार, नवाचार, इनक्यूबेशन एवं स्टार्टअप विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा तथा नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के भारत सरकार के व्यापक उद्देश्यों में भी योगदान देगा।

कुलसचिव प्रो. अजय रँगा ने कहा कि यह इनक्यूबेटर जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के एक मजबूत, समावेशी एवं प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार इकोसिस्टम के निर्माण के दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इससे हरियाणा एवं आसपास के क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता एवं स्टार्टअप विकास को महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है।

प्रो. गोयल ने इस महत्वपूर्ण पहल को मूर्त रूप देने में कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार एवं कुलसचिव प्रो. अजय रँगा द्वारा लिए गए विशेष रुचि एवं सक्रिय सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों अधिकारियों के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन एवं विभिन्न स्तरों पर प्राप्त संस्थागत सहयोग ने प्रस्ताव को आगे बढ़ाने तथा समावेशी प्रौद्योगिकी बिजनेस इनक्यूबेटर की परिकल्पना को एक ठोस पहल में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए प्रो. संजीव गोयल ने बताया कि प्रस्तावित टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर हरियाणा राज्य में अपनी तरह का पहला इनक्यूबेटर होगा और यह राज्य के नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ने जा रहा है। यह पहल विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं युवाओं  के बीच नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा प्रौद्योगिकी-आधारित स्टार्टअप्स के विकास के लिए एक मजबूत मंच उपलब्ध कराएगी।

प्रो. गोयल के अनुसार, इस इनक्यूबेटर का उद्देश्य अकादमिक जगत में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही, विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां नवाचार एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम अभी प्रारंभिक अवस्था में है। यह पहल एक जीवंत क्षेत्रीय नवाचार इकोसिस्टम के निर्माण में सहायक होगी तथा आसपास के क्षेत्रों में एक मजबूत स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करेगी।

उन्होंने आगे बताया कि प्रस्तावित इनक्यूबेटर शैक्षणिक संस्थानों, निवेशकों, मेंटर्स, उद्योगों एवं अन्य संस्थानों के बीच एक सहयोगात्मक नेटवर्क विकसित करने की दिशा में कार्य करेगा। इसके माध्यम से नवोन्मेषकों एवं उभरते उद्यमियों को मेंटॉरशिप, तकनीकी विशेषज्ञता, उद्योग संपर्क एवं अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के अवसर सृजित होंगे, जिससे नवीन विचारों को सफल उद्यमों में परिवर्तित करने में सहायता मिलेगी।

यह उपलब्धि जे.सी. बोस विश्वविद्यालय द्वारा एक मजबूत, समावेशी एवं प्रौद्योगिकी-संचालित नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा इससे हरियाणा में नवाचार-आधारित उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को नई गति मिलने की उम्मीद है।